सूरी ने कहा, "यह सही है," जब मैं सो गया तो मैंने अपनी राय दी।" सूरी ने कहा, "यह सही है," जब मैं सो गया तो मैंने अपनी राय दी।"
मैंने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है थोड़ी सी वाह वाही के चक्कर में। मैंने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है थोड़ी सी वाह वाही के चक्कर में।
कथाकार को लगा कि वह किससे बातें कर रहा है.... कहीं यह मेरा अक्स तो नहीं...! कथाकार को लगा कि वह किससे बातें कर रहा है.... कहीं यह मेरा अक्स तो नहीं...!
लेखक : राजगुरू द. आगरकर अनुवाद : आ. चारुमति रामदास लेखक : राजगुरू द. आगरकर अनुवाद : आ. चारुमति रामदास
मोहन और रमेश लंगोटिया यार थे। ऐसे पक्के दोस्त, जिनकी मिसाले गाँव भर में दी जाती थी। मोहन और रमेश लंगोटिया यार थे। ऐसे पक्के दोस्त, जिनकी मिसाले गाँव भर में दी जाती ...
नटखट हैं तू नन्दलाल मन को हर्षाये मेरे ओ मोहन तू वृन्दावन के लाल मेरो कान्हा। नटखट हैं तू नन्दलाल मन को हर्षाये मेरे ओ मोहन तू वृन्दावन के लाल मेरो कान्हा।